Wednesday, January 18, 2012

व्यंग्य : फेसबुक और गूगल पर प्रतिबंध मामले में भारत सरकार को एक खुली चिट्ठी...

एक स्थान पर अभद्र भाषा के लिए क्षमाप्रार्थी हूं...

प्रिय भारत सरकार...

मेरी करबद्ध प्रार्थना है कि आप फेसबुक और गूगल को प्रतिबंधित (बैन) करने का निर्णय लेने से पहले निम्नलिखित कारणों पर विचार अवश्य करें...

1.    जैसे ही आप फेसबुक और गूगल (जिसके साथ यूट्यूब भी होगा) को प्रतिबंधित करेंगे, जनता एन्ड्रायड / स्मार्टफोन खरीदना बंद कर देगी, और 3जी सेवाओं की ज़रूरत भी खत्म हो जाएगी... जब ऐसा होगा, तो असल में आप खुद का उससे भी ज़्यादा नुकसान कर बैठेंगे, जितना ए राजा पहले कर चुके हैं, क्योंकि ऐसे फोनों की निर्माता कंपनियां अपनी लाइसेंस फीस की वसूली के लिए कॉल दरें बढ़ा देंगी, जिससे लोग फोन करने से पहले कई-कई बार सोचेंगे, और अंततः आपका ग्रामीण विकास (लैपटॉप और फोन के जरिये) का सपना, आखिरकार सपना होकर ही रह जाएगा...

2.    और कहने की ज़रूरत नहीं है कि इसके साथ ही आपका एन्ड्रायड-आधारित 'आकाश' भी लटक जाएगा, क्योंकि वह भी शैक्षिक (एजुकेशनल) इस्तेमाल के लिए मूलभूत रूप से गूगल पर निर्भर करता है, सो, आप खुद ही अपने देश का भविष्य कहलाने वाले बच्चों की शिक्षा का सत्यानाश कर लेंगे...

3.    इसके अलावा कन्सल्टेन्ट, रिसर्चर्स, एनैलिस्ट्स वगैरह तो नौकरियां खो ही देंगे, आईटी इंडस्ट्री का भी बंटाधार निश्चित है, क्योंकि इस इंडस्ट्री के लोग जितने भी कोड लिखा करते हैं, उनमें आधे से ज़्यादा गूगल से ही कॉपी-पेस्ट किए जाते हैं...

4.    यह भी ध्यान रखें, भारतीय लोग आमतौर पर याहू की दिशा में लौटना नहीं चाहते, क्योंकि वह बहुत ज़्यादा फैला हुआ है, और काम की चीज़ ढूंढना काफी मुश्किल है, और एमएसएन अभी तक इतना ज़्यादा 'अमेरिकी' है कि भारतीयों को इस्तेमाल करने में मज़ा आ ही नहीं सकता...

5.    शब्दों के आधार पर प्रतिबंध लगाने से भी आपका अपना ही नुकसान होगा, क्योंकि 'Virgin' एयरलाइन्स और Sen'sex' शर्तिया बंद हो जाएंगे, और देश की अर्थव्यवस्था की मां.... चलो, समझ ही गए होंगे आप...

6.    देश की आधी आबादी (कन्याएं) में से आधी से ज़्यादा हर समय पगलाई (हिस्टेरिक) रहेंगी, क्योंकि उन्हें अपने फेसबुक स्टेटस और उनमें से प्रत्येक स्टेटस पर 150-200 लाइक्स नज़र नहीं आएंगे...

7.    एक नुकसान निजी है, फिर भी देश के युवाओं के मन की बात समझकर सुनिएगा... मुझे कभी यह जानकारी नहीं मिल पाएगी, कौन-सी लड़की का ब्रेक-अप हो चुका है, और वह खाली है या कौन-सी लड़की फ्लर्ट करने वाले लड़कों को पसंद करती है...

8.    अंत में... सबसे महत्वपूर्ण कारण यह है कि हम सब भारतीय हैं... गरीबी-वरीबी, बेरोजगारी-वेरोजगारी, करप्शन-वरप्शन पर आपकी बकचोदी सालों से सुनते आ रहे हैं, और वह सब चलता है, लेकिन फेसबुक-गूगल से पंगा मत लेना, वरना सरकार सचमुच गिर जाएगी...

आपका शुभचिंतक
एक आम भारतीय नागरिक...

6 टिप्पणियां...:

  1. वाह!
    मजा आ गया
    सभी भारतीयों के दिल की बात कह दी

    प्रणाम स्वीकार करें

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    Replies
    1. प्रणाम, अन्तर भाई... बहुत-बहुत शुक्रिया... :-)

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  2. kya bat hai
    dil khush kar diya bhai

    ReplyDelete

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अब क्या कहूं अपने बारे में... विवाहित हूं, एक बेटा और एक बेटी हैं... पत्नी का नाम हेमलता है, लेकिन हम हेमा कहते हैं... बेटे का नाम सार्थक है और बेटी का नाम है निष्ठा... पत्नी बरेली (उत्तर प्रदेश) के पास एक कस्बे आंवला में राज्य सरकार के एक डिग्री कॉलेज में हिन्दी विषय की प्रवक्ता (लेक्चरर) हैं, सो, वह बच्चों के साथ बरेली रहती हैं, और मैं अपने माता-पिता के साथ दिल्ली में... संप्रति एनडीटीवीखबर.कॉम का संपादकीय प्रमुख हूं... अपने स्कूली साथियों की जानकारी के लिए बता रहा हूं कि मैंने पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1991 में एक सांध्य दैनिक से की थी... उसके बाद दिल्ली प्रेस, कुबेर टाइम्स तथा दैनिक जागरण जैसे प्रिंट संस्करणों में सहयोग देकर फरवरी, 2000 में डॉटकॉम पत्रकारिता में प्रवेश किया... सिर्फ एक साथी के साथ जागरण.कॉम लॉन्च करने के बाद से अब तक अपने नेतृत्व में टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के लिए नवभारतटाइम्स.कॉम, हिन्दुस्तान टाइम्स समूह के लिए हिन्दुस्तानदैनिक.कॉम (अब लाइवहिन्दुस्तान.कॉम) तथा एनडीटीवीखबर.कॉम लॉन्च कर चुका हूं...

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