Friday, November 18, 2011

शरारती सार्थक, और मौजूदा शिक्षा व्यवस्था से सवाल...

'मौजूदा शिक्षा व्यवस्था' विषय पर आयोजित की गई निबन्ध प्रतियोगिता में शरारती सार्थक का लिखा निबन्ध अस्वीकार कर दिया गया, सो, घर आकर गुस्से से बोला, "सच सुनने की ताकत ही नहीं रही है किसी में... बस, पढ़ा और फेंक दिया..."

पिता ने उलझन-भरे स्वर में पूछा, "निबन्ध में क्या लिखा था तुमने...?"

सार्थक ने तपाक से कॉपी पिता की तरफ बढ़ाई, जिसमें लिखा था, "मौजूदा शिक्षा व्यवस्था से मेरा और मेरी पीढ़ी के सभी साथियों का एक ही सवाल है - अगर एक ही अध्यापक सभी विषय पढ़ा नहीं सकता, तो हम छात्रों से यह आशा कैसे की जा सकती है कि एक ही छात्र सभी विषयों को समझ और याद कर सकता है..."

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अब क्या कहूं अपने बारे में... विवाहित हूं, एक बेटा और एक बेटी हैं... पत्नी का नाम हेमलता है, लेकिन हम हेमा कहते हैं... बेटे का नाम सार्थक है और बेटी का नाम है निष्ठा... पत्नी बरेली (उत्तर प्रदेश) के पास एक कस्बे आंवला में राज्य सरकार के एक डिग्री कॉलेज में हिन्दी विषय की प्रवक्ता (लेक्चरर) हैं, सो, वह बच्चों के साथ बरेली रहती हैं, और मैं अपने माता-पिता के साथ दिल्ली में... संप्रति एनडीटीवीखबर.कॉम का संपादकीय प्रमुख हूं... अपने स्कूली साथियों की जानकारी के लिए बता रहा हूं कि मैंने पत्रकारिता की शुरुआत वर्ष 1991 में एक सांध्य दैनिक से की थी... उसके बाद दिल्ली प्रेस, कुबेर टाइम्स तथा दैनिक जागरण जैसे प्रिंट संस्करणों में सहयोग देकर फरवरी, 2000 में डॉटकॉम पत्रकारिता में प्रवेश किया... सिर्फ एक साथी के साथ जागरण.कॉम लॉन्च करने के बाद से अब तक अपने नेतृत्व में टाइम्स ऑफ इंडिया समूह के लिए नवभारतटाइम्स.कॉम, हिन्दुस्तान टाइम्स समूह के लिए हिन्दुस्तानदैनिक.कॉम (अब लाइवहिन्दुस्तान.कॉम) तथा एनडीटीवीखबर.कॉम लॉन्च कर चुका हूं...

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