कक्षा में मैडम ने शरारती सार्थक से पूछा, "बेटे, तुम बड़े होकर क्या करोगे...?"
सार्थक का जवाब था, "शादी..."
मैडम तुरंत बोली, "नहीं, नहीं... मेरा मतलब था, तुम बड़े होकर क्या बनोगे...?"
सार्थक ने कहा, "दूल्हा..."
मैडम फिर बोली, "अरे, मेरा मतलब है, तुम बड़े होकर क्या हासिल करोगे...?"
सार्थक ने जवाब दिया, "दुल्हन..."
मैडम झुंझलाकर बोली, "अरे बेवकूफ, मेरा मतलब है, तुम बड़े होकर अपने मम्मी-पापा के लिए क्या लेकर आओगे...?"
सार्थक ने मुस्कुराते हुए कहा, "बहू..."
अब तक मैडम का पारा चढ़ने लगा था, "उफ्फ... बेवकूफ... तुम्हारे मम्मी-पापा तुमसे किस चीज़ की ख्वाहिश रखते हैं...?"
सार्थक के चेहरे पर भी अब तक कुटिल मुस्कान आ चुकी थी, "पोते की..."
मैडम का दिमाग खराब हो चुका था, सो, लगभग चीखते हुए पूछा, "हे भगवान... बेवकूफ... आखिर तुम्हारी ज़िन्दगी का मकसद क्या है...?"
सार्थक ने तपाक से कहा, "हम दो, हमारे दो..."
चुटकुला ऐसी संज्ञा है, जिससे कोई भी अपरिचित नहीं... हंसने-हंसाने के लिए दुनिया के हर कोने में इसका प्रयोग होता है... खुश रहना चाहता हूं, खुश रहना जानता हूं, सो, चुटकुले लिखने-पढ़ने और सुनने-सुनाने का शौकीन हूं... कुछ चुनिंदा चुटकुले, या हंसगुल्ले, आप लोगों के सामने हैं... सर्वलोकप्रिय श्रेणियों 'संता-बंता', 'नॉनवेज चुटकुले', 'पति-पत्नी' के अलावा कुछ बेहतरीन हास्य कविताएं और मेरी अपनी श्रेणी 'शरारती सार्थक' भी पढ़िए, और खुद को गुदगुदाइए...
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Wednesday, December 01, 2010
बड़ा होकर क्या बनेगा शरारती सार्थक...?
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