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Friday, April 06, 2012

पाकिस्तानी फौजी और हिन्दुस्तानी मेजर संता सिंह...

पाकिस्तान के तीन शीर्ष फौजी अधिकारी हिन्दुस्तान के दौरे पर आए, तो भारतीय सेनाप्रमुख ने उनके सम्मान में एक रात्रिभोज का आयोजन किया, और मेजर संता सिंह को उनकी मेजबानी की जिम्मेदारी सौंपी...

शराब के कई दौर चलने के बाद सभी ने भोजन किया, और उसके बाद अपने-अपने तजुर्बे सुनाने शुरू कर दिए...

कुछ ही देर में तजुर्बों का रुख शादी और सुहागरात तक पहुंच गया, और सबसे पहले पाकिस्तानी जनरल साहब ने कहा, "मैंने अपनी सुहागरात पर अपनी बीवी के साथ छह बार संभोग किया था..."

उनके साथ आए एक ब्रिगेडियर ने चेहरे पर प्रशंसा के भाव लाते हुए मुसाहिबी के अंदाज़ में तपाक से कहा, "वाह जनाब, वाह... वैसे मैंने भी चार बार किया था..."

इसके बाद उन्होंने अपने साथ आए एक कर्नल से अपना अनुभव बताने के लिए कहा, तो वह बोला, "जनाब, मैंने सुहागरात पर अपनी बीवी के साथ दो बार संभोग किया था..."

जनरल और ब्रिगेडियर के चेहरे पर उपहास के भाव आए, और संता की तरफ मुड़कर बोले, "आप भी बताइए, जनाब... हिन्दुस्तानियों का स्टैमिना तो पता चले..."

संता ने झिझकते हुए कहा, "माफ कीजिएगा, जनाब, मैं तो सिर्फ एक ही बार कर पाया था..."

तीनों पाकिस्तानी फौजी अधिकारी ज़ोर से हंसे, और मज़ाक उड़ाते हुए बोले, "क्यों भाई, ऐसा क्यों...?"

संता ने मुस्कुराते हुए कहा, "दरअसल, मेरी बीवी को इस सबकी आदत कतई नहीं थी..."

Wednesday, August 31, 2011

नादान संता सिंह की शादी, और मंझे हुए बंता सिंह...

नादान संता सिंह की शादी तय हुई तो परेशान रहने लगे...

दूर किसी शहर में रहने वाले उनके मित्र बंता सिंह उनकी शादी में शरीक होने पहुंचे, तो सवाल कर बैठे, "क्या हुआ, दोस्त... इतने दुखी क्यों हो...?"

संता ने परेशानी बांटते हुए कहा, "यार, क्या बताऊं... शादी होने वाली है, और मुझे कुछ आता ही नहीं... बस, यही डर सताता रहता है कि कहीं सुहागरात पर ही बेइज़्ज़ती न हो जाए..."

बंता ने संता का कंधा थपथपाते हुए कहा, "दुखी न हो, दोस्त, हम मंझे हुए खिलाड़ी हैं... चल हमारे साथ, सब सिखा देंगे एक ही रात में..."

सो, संता को साथ लेकर बंता पहुंच गए रेडलाइट एरिया में, और किस्मत देखिए, जैसे ही कमरे में घुसने लगे, बिजली चली गई...

बहरहाल, सिखाने का वादा था, सो, एक लालटेन ली, और संता को पकड़ाकर बोले, "तू इसे पकड़कर खड़ा रह, और देखता जा, मैं क्या-क्या कैसे-कैसे करता हूं..."

संता लालटेन थामे हुए उसकी रोशनी में सब कुछ बहुत ध्यान से देखते रहे, और फिर बिस्तर से उठकर बंता ने पूछा, "समझ आया कुछ, या अब भी कोई दुविधा है...?"

संता ने चहकते हुए जवाब दिया, "अरे यार, यह तो बहुत आसान है... मज़े से कर सकता हूं... अब मेरी सारी समस्या दूर हो गई..."

खैर, इसके बाद दोनों दोस्तों की मुलाकात लगभग पांच साल बाद बाज़ार में हुई, तो पुरानी यादें ताज़ा करने के लिए कॉफी शॉप में जाकर बैठ गए...

एक-दूसरे से हालचाल पूछने के बाद बंता ने पूछा, "और बता, यार... शादीशुदा ज़िन्दगी में कोई परेशानी तो नहीं...?"

संता ने भावुक होकर कहा, "बिल्कुल नहीं, दोस्त... मैं हमेशा उसके लिए तुम्हारा एहसानमंद रहूंगा... मेरी शादीशुदा ज़िन्दगी बहुत मज़े से कट रही है, और दो बच्चे भी हैं..."

बंता ने बधाई देते हुए, शरारती स्वर में अगला सवाल किया, "कभी-कभी बिस्तर में नयापन लाने के लिए भी कुछ करता है या बस, वैसे ही चल रहा है...?"

संता ने जवाब दिया, "कुछ खास नहीं... कभी लालटेन दाएं हाथ से पकड़ लेता हूं, कभी बाएं हाथ से..."

Friday, March 04, 2011

बंता सिंह की सुहागरात, और पत्नी की औकात...

सुहागरात के लिए कमरे में घुसने से पहले दोस्तों ने बंता सिंह के कान भरने शुरू कर दिए...

"यार, अगर बीवी को पहली ही रात में उसकी औकात न दिखाई जाए, तो सारी उम्र सिर पर चढ़कर नाचती हैं... बीवी के साथ सोना तेरा हक है, और उसे पहली ही रात यह समझा देना, वरना अपने शरीर को ही हथियार बनाकर वह सारी ज़िन्दगी तेरी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करती रहेगी..."

बंता यह सब सुनकर घबरा गया, और दोस्तों से पूछा, "लेकिन फिर मुझे करना क्या चाहिए...?"

दोस्त ने तपाक से उपाय बताया, "बीवी को पहली ही रात एहसास दिला दे कि तुझे उसके शरीर का लालच नहीं है, और वह तेरे साथ सोकर कोई एहसान नहीं कर रही है..."

बंता ने फिर सवाल किया, "लेकिन यह एहसास दिलाने के लिए क्या करूं...?"

दोस्त ने कहा, "रात को जीभर के मज़ा कर बीवी के साथ, लेकिन सुबह कमरे से बाहर आने से पहले 1000 रुपये का नोट उसके हाथ में थमाना, और कहना कि तू यह सब किसी के साथ भी मुफ्त में नहीं करता... इससे तेरी बीवी को एहसास हो जाएगा कि तुझे कोई परवाह नहीं है कि वह तेरे साथ सोती है या नहीं, क्योंकि तेरे पास घर के बाहर भी जुगाड़ हैं..."

बंता दोस्त का तर्क समझ गया...

उसने रात भर दोस्त का कहना मानकर मज़े किए, और सुबह कमरे से बाहर आते वक्त सलाह के मुताबिक 1000 रुपये का नोट बीवी के हाथ में थमाकर बोला, "तेरे साथ मज़ा आया, मेरी रानी... लेकिन मैं यह सब मुफ्त नहीं करता, इसलिए यह पकड़ अपने हक के पैसे..."

पत्नी ने भी तपाक से नोट पकड़ लिया, और अपने पर्स से 500 रुपये का नोट निकालकर बंता सिंह को पकड़ाकर बोली, "मुझे क्या चोर समझा है, यह लो पांच सौ रुपये... किसी से भी हक से ज़्यादा नहीं लेती मैं..."

संता और सुहागरात पर लजाती-सकुचाती पत्नी...

संता सिंह सुहागरात पर लजाती-सकुचाती पत्नी के पास पहुंचे, और प्यार से बोले, "जानेमन, अपनी सूरत दिखा दो, बहुत देर से तरस रहा हूं, तुम्हें निहारने के लिए..."

पत्नी ने भी शर्माते हुए घूंघट को कसकर पकड़ लिया, और न में गर्दन हिलाई...

संता ने प्यार से घूंघट को थामा, और उसे उठाने लगा, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई...

यह क्या, खटखटाने की आवाज़ सुनते ही पत्नी उठी, और झट से खिड़की से बाहर कूद गई...

संता हैरान रह गया, लेकिन उसने पहले जाकर लगातार बजता दरवाज़ा खोला...

देखा, भाभी हाथ में एक ट्रे लिए खड़ी थीं, जिस पर दूध से भरे दो गिलास रखे थे...

भाभी मुस्कुराईं, और प्यार से बोलीं, "लल्ला जी, दुल्हन को दूध ज़रूर पिला देना..."

संता ने भी हंसते हुए जवाब दिया, "जी भाभी...", लेकिन उनका सारा ध्यान अपनी पत्नी की हरकत पर था, सो, तुरंत ही भाभी को विदा कर दिया, और अंदर आकर बोले, "जानेमन, अंदर आ जाओ... भाभी थीं, दूध देने आई थीं..."

इतना सुनकर पत्नी भी अंदर आ गई, तो संता ने हैरानी-भरे स्वर में पूछा, "मेरी जान, शर्माना तो समझ में आता है, लेकिन तुम खिड़की से बाहर क्यों कूद गई थीं...?"

पत्नी ने तपाक से जवाब दिया, "अजी कुछ नहीं जी, मुझे लगा रेड पड़ गई है..."

Friday, December 17, 2010

सुहागरात पर दुल्हन को सहेलियों की सलाह...

बदलती जा रही हैं सुहागरात से पहले दुल्हन को सहेलियों द्वारा दी जाने वाली सलाह...

1980: जीजाजी (दूल्हा) जो भी करें, करने देना...

1990: जो भी हो रहा हो, बरदाश्त कर लेना, रोकना मत...

2000: फिक्र न कर, तुझे सब पता तो है...

2010: यार, कोई नया तरीका पता चले, तो हमें भी ज़रूर बताना...
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मेरी पसंदीदा कविताएं, भजन और प्रार्थनाएं (कुछ पुरानी यादें)...

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