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Thursday, October 27, 2011

संता फंसा अजीब-सी मुसीबत में...

संता सिंह की रुंआसी सूरत देखकर उसके मित्र बंता सिंह ने सवाल किया, "क्या हुआ, दोस्त... इस तरह मुंह लटकाए क्यों बैठे हो...?"

संता ने कहा, "यार, बहुत अजीब-सी मुसीबत में फंस गया हूं..."

बंता के चेहरे पर उलझन के भाव आए, बोला, "कैसी मुसीबत...?"

संता ने जवाब दिया, "यार, बीवी मेकअप करे, तो खर्च बर्दाश्त नहीं होता... और मेकअप न करे, तो बीवी बर्दाश्त नहीं होती..."

Tuesday, October 11, 2011

नन्ही निष्ठा, और डरावनी चुड़ैल जैसी शक्ल...

नन्ही निष्ठा बेहद ज़ोर-ज़ोर से रो रही थी...

मां ने देखा, दौड़कर पास आई, सीने से लगाया, और सिर पर हाथ फिराते हुए पूछा, "क्या हुआ मेरी गुड़िया-सी बेटी को, रो क्यों रही है...?"

निष्ठा ने सुबकते हुए सवाल किया, "मम्मी, क्या मैं डरावनी चुड़ैल जैसी लगती हूं...?"

मम्मी ने तुरंत कहा, "नहीं बेटी, बिल्कुल नहीं..."

निष्ठा ने फिर पूछा, "क्या मेरी आंखें मेंढकी जैसी हैं...?"

मम्मी ने फिर कहा, "अरे, कौन कहता है... मेरी गुड़िया तो मृगनयनी है, मृगनयनी..."

निष्ठा के सवाल अब भी खत्म नहीं हुए थे, "क्या मेरी नाक भैंस जैसी है...?"

मम्मी ने बिटिया के सिर पर हाथ फिराते हुए बेहद प्यार से कहा, "हरगिज़ नहीं, मेरी बच्ची, तेरी नाक तो बिल्कुल सुतवां और बहुत सुन्दर है..."

निष्ठा का सुबकना तब भी बन्द नहीं हुआ, बोली, "क्या मैं गैण्डे की तरह बेडौल हूं...?"

मम्मी ने अब भी धैर्य नहीं खोया, और बोली, "ऐसा कतई नहीं है, निष्ठा... तू तो बार्बी डॉल जैसी प्यारी है..."

अब निष्ठा के चेहरे पर गुस्से के भाव आए, और ज़ोर से बोली, "अब नहीं छोड़ूंगी उस पड़ोसन को... वह कह रही थी, मैं बिल्कुल अपनी मम्मी जैसी दिखती हूं..."

Tuesday, September 13, 2011

शरारती सार्थक, गणित की मैडम, और उदाहरण...

गणित की मैडम ने लेक्चर के बाद बच्चों से कहा, "मैं उम्मीद करती हूं कि आप सभी लोग समझ गए होंगे... अगर A=B, और B=C हो, तो A=C होता है..."

सभी बच्चों ने कहा, "जी मैडम, समझ गए..."

अब मैडम ने शरारती सार्थक को इशारा किया, और बोलीं, "कोई उदाहरण दो, सार्थक, ताकि हमें पता चले कि तुम सचमुच समझ गए हो..."

सार्थक ने तपाक से जवाब दिया, "मैडम, मैं आपसे प्यार करता हूं, और आप अपनी बेटी से प्यार करती हैं... इसका मतलब हुआ, मैं आपकी बेटी से प्यार करता हूं..."

संता सिंह नहीं बन पाया डॉक्टर...

संता सिंह और बंता सिंह स्कूल में एक साथ पढ़ते थे, लेकिन बाद में अलग-अलग शहरों में बस जाने के कारण कई साल बाद मिले...

बंता ने पूछा, "आजकल क्या चल रहा है, दोस्त...?"

संता ने जवाब दिया, "बस, कट रही है..."

बंता ने फिर पूछा, "आवाज़ से बहुत उदास लग रहा है, भाई... तेरा डॉक्टर बनने का सपना पूरा हुआ या नहीं...?"

संता ने मायूस स्वर में जवाब दिया, "नहीं यार, सिर्फ एक सवाल के चक्कर में फेल हो गया..."

बंता ने हैरानी जताते हुए पूछा, "अरे, क्या सवाल था...?"

संता ने कहा, "अगर एक लड़की बेहोश हो जाए, तो सबसे पहले क्या चेक करना चाहिए...?"

बंता ने कहा, "फिर...?"

संता ने बताया, "जिन लड़कों ने 'नब्ज़' लिखा था, वे सभी आज डॉक्टर हैं..."

Thursday, April 28, 2011

आई ऑब्जेक्ट, माई लॉर्ड...

एक मुकदमे के दौरान एक बेहद खूबसूरत लड़की को गवाह के तौर पर बुलाया गया...

बचाव पक्ष के वकील ने लड़की से सवाल किया, "परसों रात तुम कहां थी...?"

लड़की ने सकुचाते हुए जवाब दिया, "मैं अपने एक मित्र के साथ डिनर करने कनॉट प्लेस गई थी, फिर हम लगभग 11 बजे डिस्को गए, और फिर लगभग दो बजे हम उसके घर चले गए..."

वकील साहब ने अगला सवाल दागा, "और कल रात...?"

लड़की ने पहले से भी अधिक सकुचाते हुए कहा, "कार्यक्रम बिल्कुल पिछली रात जैसा ही रहा, लेकिन कल रात मैं अपने दूसरे मित्र के साथ थी..."

वकील ने धीरे से तीसरा सवाल किया, "आज रात का तुम्हारा क्या कार्यक्रम है...?"

तभी सरकारी वकील अपनी सीट पर खड़े होकर चिल्लाया, "आई ऑब्जेक्ट, माई लॉर्ड... मैं गवाह से यह सवाल पहले ही कर चुका हूं..."

Wednesday, April 27, 2011

गुप्ता जी का बेटा, गर्लफ्रेंड, और जन्मदिन का तोहफा...

करोड़पति (लेकिन कंजूस) गुप्ता जी के बेटे की गर्लफ्रेंड ने अपने जन्मदिन पर इतराते हुए गुप्ता जी के बेटे से पूछा, "मेरा जन्मदिन का तोहफा कहां है...?"

गुप्ता जी के बेटे ने मुस्कुराते हुए सवालिया जवाब दिया, "सड़क के दूसरे छोर पर सामने वह लाल रंग की फेरारी कार दिख रही है...?"

गर्लफ्रेंड बेहद उत्तेजित हो गई, और लगभग चीखकर बोली, "हां, हां, दिख रही है..."

गुप्ता जी के बेटे ने मुस्कुराहट बरकरार रखते हुए कहा, "मेरी जान, बिल्कुल इसी रंग की लिपस्टिक लेकर आया हूं तेरे लिए..."

सिक्का, गर्लफ्रेंड, और गुप्ता जी का बेटा...

विशेष नोट : हमारे गुप्ता जी अपनी कंजूसी के लिए जाने जाते हैं, जिनसे जुड़ा यह चुटकुला मेरी मित्र पूजा गोयल ने मुझे भेजा है...

गुप्ता जी के बेटे का अफेयर पड़ोस के मकान में रहने वाले अग्रवाल साहब की बेटी से चल रहा था...

एक दिन गर्लफ्रेंड ने कहा, "सुनो, आज रात पापा कहीं बाहर जा रहे हैं, सो, सिर्फ मम्मी ही घर पर होंगी... मैं मौका देखकर पीछे वाली गली में सिक्का फेंकूंगी, और तुम आवाज़ सुनते ही पिछले दरवाज़े से मेरे कमरे में घुस आना..."

गुप्ता जी का बेटा तैयार हो गया, और बेसब्री से इंतज़ार करने लगा...

रात को लगभग डेढ़ बजे गर्लफ्रेंड ने सिक्का पिछली गली में फेंका, और गुप्ता जी के बेटे का इंतज़ार करने लगी...

गुप्ता जी का बेटा लगभग तीन बजे उसके घर पहुंचा तो गर्लफ्रेंड ने गुस्साते हुए पूछा, "इतनी देर कहां लगा दी...?"

गुप्ता जी का बेटा मासूमियत से बोला, "यार, वह सिक्का ढूंढने में सारा वक्त खर्च हो गया, और फिर भी साला मिला ही नहीं..."

गर्लफ्रेंड ने झुंझलाते हुए कहा, "तुम भी बिल्कुल बेवकूफ हो... सिक्का तो मैंने धागा बांधकर फेंका था, और तभी वापस खींच लिया था..."

Wednesday, April 06, 2011

शरारती सार्थक, और मैडम से मम्मी-पापा की बात...

कक्षा में शरारती सार्थक ने मैडम के पास जाकर मुस्कुराते हुए सवाल किया, "मैडम, मैं आपको कैसा लगता हूं...?"

मैडम ने भी मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "बहुत प्यारे हो तुम..."

सार्थक ने अगला सवाल दागा, "तो फिर मैं अपने मम्मी-पापा को आपके घर कब भेजूं...?"

मैडम ने सवालिया नज़रों से सार्थक की ओर ताकते हुए पूछा, "किसलिए भला...?"

सार्थक के चेहरे पर मुस्कान बनी रही, और वह बोला, "ताकि वे आपके साथ मेरी बात आगे बढ़ाएं..."

मैडम का चेहरा अचानक तमतमा गया, और वह गुस्से से बोली, "यह क्या बकवास है...?"

सार्थक ने कुटिल मुस्कान के साथ जवाब दिया, "ट्यूशन के लिए, मैडम, ट्यूशन के लिए... कसम से, मुझे लगता है, केबल टीवी के सीरियल देख-देखकर आप बहुत बिगड़ चुकी हो..."

Monday, March 28, 2011

शरारती सार्थक, और धरती की गति...

अध्यापक ने कक्षा में सवाल किया, "यदि धरती के अपनी धुरी पर घूमने की गति 30 गुणा बढ़ जाए तो क्या होगा...?"

शरारती सार्थक ने हमेशा की तरह तपाक से जवाब दिया, "पुरुषों को हर रोज़ वेतन मिलेगा, और महिलाओं की ज़्यादा खून बहने से मौत हो जाएगी..."

Thursday, March 24, 2011

शरारती सार्थक और संस्कृत से अनुवाद...

संस्कृत की अध्यापिका ने कक्षा में कहा, "इस वाक्य का हिन्दी में अनुवाद करो... तमसो मा ज्योतिर्गमय..."

शरारती सार्थक ने तपाक से जवाब दिया, "तुम सो जाओ, मां... मैं ज्योति के घर जा रहा हूं..."

Wednesday, March 23, 2011

शरारती सार्थक और अंग्रेज़ी में अनुवाद...

अध्यापिका ने कक्षा में बच्चों से कहा, "इस वाक्य का अंग्रेज़ी में अनुवाद करो... सुषमा नहाकर कपड़े बदल चुकी है..."

शरारती सार्थक ने तपाक से जवाब दिया, "ओ शिट, आय एम लेट... (Oh shit, I am late...)"

Monday, March 21, 2011

संता सिंह, और धमकी भरा खत...

संता सिंह बेहद डरा हुआ बैठा था, तभी बंता सिंह वहां पहुंचा और पूछा, "क्या हुआ, भाई... इतना डरा-सहमा क्यों लग रहा है...?"

संता ने कहा, "अभी-अभी मुझे एक खत मिला है, जिसमें लिखा है - मेरी बीवी के साथ सोना बंद कर दो, वरना जान से हाथ धो बैठोगे..."

बंता ने सुझाव दिया, "तू उसकी बीवी के साथ सोना बंद कर दे... सब परेशानी खत्म हो जाएगी..."

संता ने निराश स्वर में कहा, "तेरे लिए कहना बहुत आसान है, दोस्त..."

बंता ने फिर पूछा, "उसकी बीवी इतनी पसंद है तुझे...?"

संता ने जवाब दिया, "नहीं, उसने खत में अपना नाम तो लिखा ही नहीं..."

Thursday, March 17, 2011

संता सिंह, पीठदर्द, डॉक्टर, और फीस...

संता सिंह कई दिन तक पीठदर्द से परेशान रहने के बाद एक नामी विशेषज्ञ के क्लीनिक पर पहुंचे तो दीवार पर लगी फीस की जानकारी से दर्द बढ़ता महसूस किया...

वहां लिखा था : मरीज की जांच और सलाह - 1000 रुपये..., पुराने रोग के लिए दूसरी बार आने पर - 500 रुपये...

संता को अचानक पैसे बचाने की तरकीब सूझी, और डॉक्टर के पास जाकर बोले, "डॉक्टर साहब, मैं आपके पास चार दिन पहले भी आया था, लेकिन मेरी पीठ का दर्द कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है..."

डॉक्टर साहब ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, "इसमें घबराने की कोई बात नहीं है, साहब... बस, वह दवा की खुराक दोगुनी कर दें, जो मैंने आपको पिछली बार लिखकर दी थी..."

Wednesday, March 16, 2011

सप्ताह में एक दिन संभोग से छुट्टी...

एक महिला ने डॉक्टर के पास जाकर परेशानी बताई, "डॉक्टर साहब, मुझे थकान बहुत रहती है, कोई उपाय बताइए..."

डॉक्टर ने शरीर की जांच करने के बाद सवाल किया, "आप संभोग कितनी बार करती हैं...?"

महिला ने जवाब दिया, "रोज़ाना कम से कम दो बार..."

डॉक्टर ने सलाह दी, "कुछ कम कीजिए... क्या आप सप्ताह में एक दिन इतवार को उस काम की छुट्टी कर सकती हैं..."

महिला ने चहकते हुए कहा, "हाय राम... इतवार को ही तो मेरे पति घर पर होते हैं... उन्हें कैसे मना कर सकती हूं..."

Thursday, March 10, 2011

शरारती सार्थक, और गरीबी व मजबूरी में अंतर...

शरारती सार्थक से सवाल किया गया, "क्या तुम बता सकते हो, गरीबी और मजबूरी में क्या अंतर होता है...?"

सार्थक ने तपाक से जवाब दिया, "गरीबी वह होती है, जब कोई जवान लड़की सिर्फ 50 रुपये में अपनी अस्मत का सौदा करने के लिए तैयार हो जाए... और मजबूरी उसे कहते हैं, जब लड़के की जेब में सिर्फ 40 रुपये हों..."

संता सिंह, कैंसर और एड्स...

संता सिंह बीमारी की लंबी छुट्टी के बाद दफ्तर आया, तो सभी सहकर्मी मिलने आए... 

सभी जानना चाहते थे, आखिर संता को क्या हुआ... 

संता ने सभी को दुखभरे स्वर में सूचना दी कि उसे एड्स हो गया है... 

सभी के जाने के बाद संता का दोस्त बंता वहां पहुंचा और बोला, "यार, तुझे तो डॉक्टर ने कैंसर बताया था, लेकिन तू अब सबको एड्स क्यों बता रहा है...?" 

संता ने चेहरे पर मुस्कान लाते हुए कहा, "मेरी पत्नी मुझे धमकी देती है, तुम्हारे मरते ही तुम्हारे ही दफ्तर के किसी आदमी से शादी कर लूंगी..."

संता सिंह के अठारह बच्चे...

इंटरव्यू के दौरान संता सिंह से सवाल किया गया, "कितने बच्चे हैं तुम्हारे...?" 

जवाब मिला, "जी, अठारह..." 

इंटरव्यू लेने वाला हैरान होकर बोला, "इतने सारे बच्चे...?" 

संता ने कहा, "हां, मैं अपना वादा कभी नहीं तोड़ता..." 

इंटरव्यू लेने वाला फिर हैरान, बोला, "क्या मतलब..." 

संता ने तपाक से जवाब दिया, "हां, मैंने शादी के वक्त अपने ससुर से वादा किया था कि उनकी बेटी को कभी खाली पेट नहीं रखूंगा..."

Tuesday, March 08, 2011

पत्नी का चिड़चिड़ा और गुस्सैल स्वभाव...

अपनी पत्नी के चिड़चिड़े और गुस्सैल स्वभाव से परेशान व्यक्ति किसी महात्मा के दर्शन के लिए गया और बोला, "महाराज, कोई ऐसा उपाय बताएं, जिससे मेरी प‍त्नी हर बात में चीखना-चिल्लाना और क्लेश करना छोड़ दे..."

महात्मा ने गंभीर स्वर में जवाब दिया, "बेटा, यदि मुझे इसका उपाय पता होता तो मैं संन्यास ही क्यों लेता..."

Friday, March 04, 2011

बंता सिंह की सुहागरात, और पत्नी की औकात...

सुहागरात के लिए कमरे में घुसने से पहले दोस्तों ने बंता सिंह के कान भरने शुरू कर दिए...

"यार, अगर बीवी को पहली ही रात में उसकी औकात न दिखाई जाए, तो सारी उम्र सिर पर चढ़कर नाचती हैं... बीवी के साथ सोना तेरा हक है, और उसे पहली ही रात यह समझा देना, वरना अपने शरीर को ही हथियार बनाकर वह सारी ज़िन्दगी तेरी भावनाओं के साथ खिलवाड़ करती रहेगी..."

बंता यह सब सुनकर घबरा गया, और दोस्तों से पूछा, "लेकिन फिर मुझे करना क्या चाहिए...?"

दोस्त ने तपाक से उपाय बताया, "बीवी को पहली ही रात एहसास दिला दे कि तुझे उसके शरीर का लालच नहीं है, और वह तेरे साथ सोकर कोई एहसान नहीं कर रही है..."

बंता ने फिर सवाल किया, "लेकिन यह एहसास दिलाने के लिए क्या करूं...?"

दोस्त ने कहा, "रात को जीभर के मज़ा कर बीवी के साथ, लेकिन सुबह कमरे से बाहर आने से पहले 1000 रुपये का नोट उसके हाथ में थमाना, और कहना कि तू यह सब किसी के साथ भी मुफ्त में नहीं करता... इससे तेरी बीवी को एहसास हो जाएगा कि तुझे कोई परवाह नहीं है कि वह तेरे साथ सोती है या नहीं, क्योंकि तेरे पास घर के बाहर भी जुगाड़ हैं..."

बंता दोस्त का तर्क समझ गया...

उसने रात भर दोस्त का कहना मानकर मज़े किए, और सुबह कमरे से बाहर आते वक्त सलाह के मुताबिक 1000 रुपये का नोट बीवी के हाथ में थमाकर बोला, "तेरे साथ मज़ा आया, मेरी रानी... लेकिन मैं यह सब मुफ्त नहीं करता, इसलिए यह पकड़ अपने हक के पैसे..."

पत्नी ने भी तपाक से नोट पकड़ लिया, और अपने पर्स से 500 रुपये का नोट निकालकर बंता सिंह को पकड़ाकर बोली, "मुझे क्या चोर समझा है, यह लो पांच सौ रुपये... किसी से भी हक से ज़्यादा नहीं लेती मैं..."

संता और सुहागरात पर लजाती-सकुचाती पत्नी...

संता सिंह सुहागरात पर लजाती-सकुचाती पत्नी के पास पहुंचे, और प्यार से बोले, "जानेमन, अपनी सूरत दिखा दो, बहुत देर से तरस रहा हूं, तुम्हें निहारने के लिए..."

पत्नी ने भी शर्माते हुए घूंघट को कसकर पकड़ लिया, और न में गर्दन हिलाई...

संता ने प्यार से घूंघट को थामा, और उसे उठाने लगा, तभी दरवाजे पर दस्तक हुई...

यह क्या, खटखटाने की आवाज़ सुनते ही पत्नी उठी, और झट से खिड़की से बाहर कूद गई...

संता हैरान रह गया, लेकिन उसने पहले जाकर लगातार बजता दरवाज़ा खोला...

देखा, भाभी हाथ में एक ट्रे लिए खड़ी थीं, जिस पर दूध से भरे दो गिलास रखे थे...

भाभी मुस्कुराईं, और प्यार से बोलीं, "लल्ला जी, दुल्हन को दूध ज़रूर पिला देना..."

संता ने भी हंसते हुए जवाब दिया, "जी भाभी...", लेकिन उनका सारा ध्यान अपनी पत्नी की हरकत पर था, सो, तुरंत ही भाभी को विदा कर दिया, और अंदर आकर बोले, "जानेमन, अंदर आ जाओ... भाभी थीं, दूध देने आई थीं..."

इतना सुनकर पत्नी भी अंदर आ गई, तो संता ने हैरानी-भरे स्वर में पूछा, "मेरी जान, शर्माना तो समझ में आता है, लेकिन तुम खिड़की से बाहर क्यों कूद गई थीं...?"

पत्नी ने तपाक से जवाब दिया, "अजी कुछ नहीं जी, मुझे लगा रेड पड़ गई है..."
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