कक्षा में मैडम ने बच्चों से सवाल किया, "आप लोग राजा राम मोहन राय के बारे में क्या जानते हैं...?"
हमेशा की तरह शरारती सार्थक ने तुरंत हाथ खड़ा किया, और चूंकि पूरी कक्षा में सिर्फ सार्थक ही ने हाथ उठाया था, मैडम ने कहा, "हां सार्थक, बताओ..."
सार्थक ने जवाब दिया, "मैडम, इन चारों लोगों में बेहद गहरी दोस्ती थी, क्योंकि जहां भी लिखा जाता है, चारों का नाम एक साथ लिखा जाता है..."
चुटकुला ऐसी संज्ञा है, जिससे कोई भी अपरिचित नहीं... हंसने-हंसाने के लिए दुनिया के हर कोने में इसका प्रयोग होता है... खुश रहना चाहता हूं, खुश रहना जानता हूं, सो, चुटकुले लिखने-पढ़ने और सुनने-सुनाने का शौकीन हूं... कुछ चुनिंदा चुटकुले, या हंसगुल्ले, आप लोगों के सामने हैं... सर्वलोकप्रिय श्रेणियों 'संता-बंता', 'नॉनवेज चुटकुले', 'पति-पत्नी' के अलावा कुछ बेहतरीन हास्य कविताएं और मेरी अपनी श्रेणी 'शरारती सार्थक' भी पढ़िए, और खुद को गुदगुदाइए...
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Thursday, August 19, 2010
शरारती सार्थक और राजा राम मोहन राय...
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Wednesday, August 11, 2010
सार्थक के जानी दोस्त...
एक रात मेरा बेटा शरारती सार्थक बहुत देर से घर आया...
मैं गुस्से में था, और आते ही पूछा, "कहां था, बदमाश...?"
सार्थक ने संक्षिप्त-सा उत्तर दिया, "दोस्त के घर था, पापा..."
मुझे लगा, वह झूठ बोल रहा है, सो, मैंने भी उसकी चोरी पकड़ने के लिए एक के बाद एक उसके 10 दोस्तों को फोन किया...
पांच ने कहा, "जी हां, यहीं था, अंकल..."
तीन ने कहा, "जी अंकल, बस, अभी-अभी निकला है..."
दो ने कहा, "जी अंकल, यहीं है, बात कराऊं क्या...?"
मैं गुस्से में था, और आते ही पूछा, "कहां था, बदमाश...?"
सार्थक ने संक्षिप्त-सा उत्तर दिया, "दोस्त के घर था, पापा..."
मुझे लगा, वह झूठ बोल रहा है, सो, मैंने भी उसकी चोरी पकड़ने के लिए एक के बाद एक उसके 10 दोस्तों को फोन किया...
पांच ने कहा, "जी हां, यहीं था, अंकल..."
तीन ने कहा, "जी अंकल, बस, अभी-अभी निकला है..."
दो ने कहा, "जी अंकल, यहीं है, बात कराऊं क्या...?"
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