Showing posts with label फार्महाउस. Show all posts
Showing posts with label फार्महाउस. Show all posts

Wednesday, December 30, 2009

रात फार्महाउस की...

संता सिंह अपने दोस्त बंता सिंह के साथ कार में किसी हिल स्टेशन पर छुट्टियां मनाने के लिए जा रहा था...

अचानक भयंकर आंधी-तूफान की वजह से उन्हें सफर बीच में ही रोकना पड़ा, और वे नज़दीक ही दिख रहे एक फार्महाउस पर रात भर ठहरने की नीयत से पहुंच गए...

दरवाज़ा एक बेहद खूबसूरत महिला ने खोला, और उनकी परेशानी सुनकर सहानुभूति जताते हुए बोली, "मुझे आपके ठहरने में कोई आपत्ति नहीं, लेकिन घर में ठहराने पर पड़ोसी मुझ अकेली महिला को बदनाम कर देंगे..."

संता-बंता ने तपाक से कहा, "हम भी आपकी परेशानी समझ गए हैं, और हम दोनों खलिहान में सो जाएंगे..."

लगभग एक साल बाद महिला के वकील का खत संता को मिला, और खत पढ़ते ही वह बंता के घर पहुंच गया...

संता ने आराम से बैठने के बाद दोस्त से पूछा, "तुझे वह खूबसूरत औरत याद है, जिसके फार्महाउस पर हम पिछले साल रुके थे...?"

बंता ने तपाक से कहा, "हां, बिल्कुल याद है..."

संता ने अगला सवाल किया, "सच-सच बताना, क्या तू रात को उठकर उसके घर के अंदर गया था, और तू फिर रात भर उसके साथ सोया...?"

बंता ने नज़रें झुकाकर शर्मिन्दगी से कहा, "हां दोस्त, यह सच है..."

संता ने फिर पूछा, "...और यह भी सच है, कि किसी भी झंझट से बचने के लिए तूने उस औरत के पूछने पर खुद के नाम की जगह मेरा नाम बताया था...?"

बंता ने फिर शर्मिन्दा होकर कहा, "हां, यह भी सच है..."

संता ने इस बार मुस्कुराते हुए कहा, "फिर मैं तेरा शुक्रिया अदा करने आया हूं, क्योंकि वह औरत मर गई है, और अपना सब कुछ मेरे नाम कर गई है..."
Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...

कौन हूं मैं...

मेरी पहेलियां...

मेरी पसंदीदा कविताएं, भजन और प्रार्थनाएं (कुछ पुरानी यादें)...

मेरे आलेख (मेरी बात तेरी बात)...