संता सिंह ने बार में घुसते ही एक बेहद सुन्दर युवती को देखा...
फिर कुछ पैग और एक घण्टे की कोशिश के बाद आखिर उसने हिम्मत जुटाई, और लड़की के पास जाकर धीरे से बोला, "अगर आप बुरा न मानें तो क्या मैं आपके साथ थोड़ी देर बातें कर सकता हूं..."
युवती अचानक ज़ोर से चीखी, "नहीं, मैं तुम्हारे बिस्तर में आने वाली नहीं हूं..."
बार में सभी लोग उसकी तरफ देखने लगे, और संता शर्मिन्दा होकर अपनी सीट पर आकर सिर झुकाकर बैठ गया...
कुछ ही मिनट बाद वही युवती उसके पास आई, और माफी मांगते हुए बोली, "मैं आपसे माफी चाहती हूं, मैंने आपको परेशान कर दिया... दरअसल मैं मनोविज्ञान की छात्रा हूं और आजकल मैं यह अध्ययन कर रही हूं कि ऐसी परिस्थितियों में लोगों की प्रतिक्रिया क्या होती है..."
इतना सुनते ही संता पूरी ताकत से चिल्लाया, "पागल हुई है क्या... 500 क्या, तुझे तो मैं 200 रुपये भी नहीं दूंगा..."
चुटकुला ऐसी संज्ञा है, जिससे कोई भी अपरिचित नहीं... हंसने-हंसाने के लिए दुनिया के हर कोने में इसका प्रयोग होता है... खुश रहना चाहता हूं, खुश रहना जानता हूं, सो, चुटकुले लिखने-पढ़ने और सुनने-सुनाने का शौकीन हूं... कुछ चुनिंदा चुटकुले, या हंसगुल्ले, आप लोगों के सामने हैं... सर्वलोकप्रिय श्रेणियों 'संता-बंता', 'नॉनवेज चुटकुले', 'पति-पत्नी' के अलावा कुछ बेहतरीन हास्य कविताएं और मेरी अपनी श्रेणी 'शरारती सार्थक' भी पढ़िए, और खुद को गुदगुदाइए...
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Wednesday, December 09, 2009
संता और मनोविज्ञान की छात्रा...
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